जाना कहां है...!

अनुत्तरित प्रश्न...!!

Sonnu Lamba
04 Feb, 2021 • 1 min read • hi
❤️ 1 💬 4 👁 878

ये जीवन...

बस यही सत्य है..

क्या जन्म से पहले भी ,मैं जीता रहा हूं..

क्या मरने के बाद भी ,मैं जीता रहूंगा..

ये ब्रहमांड अनन्त है..

ईश्वर अनन्त हैं..

और जनम मरण के चक्र मे ..घूमता

मेरा संघर्ष भी अनन्त हैं...

फिर नश्वर क्या है..

जगत मिथ्या, जिसे कहा..

वो क्या है....

सत्य क्या है..

माया क्या है..

मोह क्या है..

वैराग्य की पराकाष्ठा क्या है..

आंखो से जो नही दिखता ,वो क्या है...

क्यूं ,बाहर किसी सवाल का जबाब नही...

क्यूं,भीतर की यात्रा की दरकार हैं...

जहां मै हूं..वो सत्य नही..

जो मैं जान नही पाया...

वो रहस्य ...क्या है...

अनन्त सवालो के साथ..

अपने मन के कुरूक्षेत्र में..

मैं भी असहाय खडा हूं, केशव...

जबाब दो...मेरे सवालो के जबाब क्या है...

प्रारब्ध को बेताल की तरह ढो रहा हूं ,कब से...

कुछ तो बताओ ..मुझे जाना कहां हैं....।

©®Sonnu Lamba


1 like
☕

Support Sonnu Lamba

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Sonnu Lamba
Published By

Sonnu Lamba

@sonnulamba

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

  • Vridhi Chug · 5 years ago last edited 5 years ago

    Bohot khoob...

  • Seema sharma Srijita · 5 years ago last edited 5 years ago

    लाजबाब

  • Kumar Sandeep · 5 years ago last edited 5 years ago

    आपकी हर रचना उम्दा होती है

  • Sonnu Lamba · 5 years ago last edited 5 years ago

    आप सभी मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद, प्रोत्साहन हेतू... ????

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

More stories in Poetry
Rakesh Nathani • 19 Oct, 2026 • 1 min read

मीरदाद से मुलाकात: सवालों का समुंदर

लेखक को 'मिरदाद की किताब' पढ़ने के बाद सपने में मिरदाद मिलता है। मिरदाद समझाता है कि किताबें समुंदर जैसी हैं, जितना गहरा जाओगे नया अर्थ मिलेगा। हर व्यक्ति कर्मों के हिसाब से जीवन में आता है। उसका काम था सोई हुई चेतनाओं को जगाकर ईश्वर तक पहुँचाना।

47 0
More stories in Poetry
Rakesh Nathani • 15 Oct, 2026 • 1 min read

बागी : एक चेतना

शरीर हार्डवेयर है, चेतना उसका ऑपरेटिंग सिस्टम। बिना OS के फोन जैसे देह बेजान है। हम शरीर नहीं, चेतना हैं, यह बोध अहंकार मिटाता है। कर्म तय करता है कौन सा हार्डवेयर मिलेगा। जब चेतना डेवलपर से जुड़ती है, तो डर मिटता है, इंसान सदा अमर हो जाता है। के

53 0
More stories in Poetry
Saket Ranjan Shukla • 15 Oct, 2026 • 1 min read

एक परीक्षार्थी की व्यथा-कथा

A humorous Hindi poem titled “एक परीक्षार्थी की व्यथा-कथा” (The Ordeal of an Examinee), written from the perspective of a student sitting in an examination hall. It portrays the nervousness of facing an unfamiliar question paper, forgetting everything studied, struggling to write answers, watching the clock, worrying about unanswered questions, and fearing the results and parents’ reactions. Through witty expressions, relatable situations, and playful exaggeration, the poem captures the funny yet stressful experience of being an examinee.

66 0
More stories in Poetry
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

45 0