Ek Samjhdar Nagarik ke farz...

Lockdown Gyan

Shah Sabit Ahmad
02 Jun, 2020 • 1 min read min read • hi
❤️ 0 💬 0 👁 753
Ek Samjhdar Nagarik ke farz...

लेखक


ऐसे ही इजाज़त सरकार देती रहेगी बाहर जाने की तो कुछ दिन में तो हर मौसम की तरह एक कोरोना मौसम भी होगा ,

उम्मीद है नीचे लिखी बातें कुछ लोगों तक पहुंच पाएं इसीलिए लिख रहा हूं, लाइक, इज्ज़त बहुत मिली बस आप सब दुआओं से बस आप सब तक एक बात उस अंदाज़ में पहोच जाएं ये ख्वाहिश है जो शायद बेहतर समझ आए , क्यों के आसपास मैंने जो सना और देखा है हाल फिलहाल उस तज़र्बे लिख रहा हूं,

"" लोग इतने समझदार होते तो शायद इंदौर और मुंबई के बाद लोग ज़्यादा बीमार ना होते "" 

तो लोग क्या कर रहे उससे मतलब ना रखें आप सुरक्षित रहें, लोग भी यही सोच के निकल रहे हैं के वो सब भी निकल रहे हैं,

""बेहतर है कि समझदारी दिखाएं और बेवजह घर से बाहर ना जाएं भले ही किसी के दो दिन के लिए बुरे बन जाए,

""ख़ुद के लिए नहीं तो मुहल्ले और शहर के लिए ही कुछ दिन का सब्र अच्छा है,

तेरे भी बीवी बच्चे मां बाप सभी हैं ज़िम्मेदारी तेरी , अब थोड़ी तू बच्चा है ""

एक अपील एक देशप्रेमी साथ में एक देश में रहने के नाते मान लीजिए बात ये बेटा भाई या कोई अपना समझ के , कुछ दिन घर से ना निकलने से ये तो नहीं होगा के बीमारी ख़तम हो जाए बस ये मुमकिन है कि शायद कम लोगों में ही फैले और उस तेज़ी से असर ना कर पाए ये पैंडेमिक और तब तक ख़ुदा की कुछ रहमत हो और क्या पता दवा बनने कि जो बात आई है सामने वो सच हो जाएं और पहले इसका कुछ हल निकल आए,

"" गलत बयान और फ़ालतू का ज्ञान बांटने से बचें, घर में रहकर ही कोरोना की जंग जीत कर इतिहास रचें

और एक ख़ास बात, क्यों के ये आप सबके फ़ायदे के लिए है,"

"इस लॉकडाउन को ना समझो सरकार का अत्याचार,

अगर ऐसा समझते हो , तो तुम हो दिमाग़ से लाचार,

घर पर रहना है तुम्हारे लिए ही सुरक्षित है यार।

एक लाइन व्यापार का बहाना और नौकरी की बात कर के बाहर जाने वालो के लिए,

क्या तू कर पाएगा नौकरी और संभल पाएगा तेरा घर बार,

अगर तू ही ना ज़िंदा रहा मेरे यार,

खुलेगी सभी वो दुकानें और चलेंगे वैसे ही सब व्यापार,

बस नुकसान होगा तेरा , खो के तुझे तेरा रोएगा तेरा घर परिवार।

काफ़ी चीज़ों को इसमें नहीं कर पाया हूं कवर तो बस जितना लिखा है उस बात को है इशारा समझें और सेफ रहें, ख्याल रखें.


0 likes
☕

Support Shah Sabit Ahmad

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Shah Sabit Ahmad
Published By

Shah Sabit Ahmad

@shahsabitahmad

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

Trending on Paperwiff
Saket Ranjan Shukla • 10 Oct, 2026 • 1 min read min

अब बात ख़तम

The poem “Ab Baat Khatam” expresses the exhaustion of someone who has finally decided to stop trying to save a relationship. After saying everything that needed to be said and enduring everything that needed to be endured, the speaker reflects on the pain, misunderstandings, broken trust, and self-blame they have carried. They also remind the other person that their own journey was not free of struggles or thorns. The poem ends with a firm, emotional decision: the speaker has stayed as long as they could, but now it is time to let go. It captures the quiet pain of reaching one's limit and choosing closure over further suffering.

54 0
Trending on Paperwiff
Rakesh Nathani • 09 Oct, 2026 • 1 min read min

मेरी राख: एक सफर

राकेश मृत्यु के बाद अपनी ही राख के सफर का साक्षी बनता है। जलगाँव में शरीर जलता है, फिर राख के तीन हिस्से — जन्मस्थान की नाराज़ नदी, पुणे के पुल पर बहा अधूरा इश्क़ और मुंबई के समंदर में विलीन अहंकार। आखिरी राख बेटा गुरुस्थान की मौन मिट्टी में बिखेरता है, जहाँ राकेश समझता है — मीटिंग, जायदाद, प्रेम सब रेगिस्तान में 'ओसिस' जैसा भ्रम था, सच तो शून्यता है।

21 0
Trending on Paperwiff
chandra mohan katyal • 07 Oct, 2026 • 1 min read min

तू है यहीं कहीं

जब मुहब्बत रूहानी हो तो जिस्मानी गैरमौजूदगी कुछ मायने नहीं रखती | इसी मनोभाव को अपनी कुछ मौलिक स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से साझा कर रहा हूँ |

32 0
Trending on Paperwiff
Rajesh Mohan V Rao • 03 Oct, 2026 • 1 min read min

Konkani

Our Konkani

78 0