बेरोजगारी

बेरोजगारी मिठना है

Sana kousar
24 Apr, 2022 • 0 mins read min read • hi
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बेरोजगारी

बेरोजगार को मीठा कर रोजगार बनाना है देश को इस हरियाली की तरह हरा भरा बनाना है

लिख पढ़ कर भी बेरोजगार बना है

यंहा इंसान मायूस होकर घर बैठा है।

कागज़ो को लिए घर से निकलता है

एक उम्मीद से गली गली भटकता है

यहां इंसान मायूस होकर घर लौटता है।

तेरे साथी रोजगार बन गए तू ऐसे ही बैठा है

ऐसे तानों से ओ हर रोज परेशान है

यहां इंसान बेरोजगारी से टूटा है।

सरकार ने डिग्रियां देकर पैसा लूट लिया

रोजगार बनानेका वादा करके मुंह मोड़ लिया

नेताओं के भ्रष्टाचार से अनाड़ी यों को रोजगार बना दिया

करना पाया काम तो ओ नुकसान कर दिया।

बेरोजगारी से परेशान,रिश्तेदारों के बातों से हैरान

ज़िदगी से मायूस होकर बैठा है इंसान।

एक नही,लाख बैठे हैं ऐसे

इस देश में नजानें जी रहे हैं कैसे

इंसान को बेरोजगारी खा रही है ऐसे

फिर भी जी रहे हैं जैसे तैसे,जैसे तैसे।

देश के हर नागरिक को समझनी है ये बात

देश से बेरोजगारी मीठाना है,एकता नही

हर एक को काम देना है, छिन ना नही

देश से गरीबी भागना है,देशवासियों को नही

देश से बेरोजगारी मिठाना है,एकता नही।









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