भोर उसके हिस्से की

समीक्षा एक नजर में

Ruchika Rai
15 Apr, 2023 1 min read min read hi
❤️ 0 💬 0 👁 891
भोर उसके हिस्से की

Photo by Studio Media on Unsplash

भोर उसके हिस्से की साहित्य विमर्श प्रकाशन गुरुग्राम द्वारा प्रकाशित की गई है।

इसके लेखक रणविजय एक रेलवे अधिकारी हैं।

 कई परतों में कैद स्त्री मन को लेखक ने जिस प्रकार पढ़कर जीवंत किया है उसे पढ़कर लगता है एक स्त्री मन को एक पुरूष द्वारा कैसे इतनी अच्छी तरह से समझा गया है।

और जो कहते हैं कि स्त्री मन को पढ़ना इतना आसान नही उसके लिए भोर हिस्से की उपन्यास का पढ़ना बहुत जरूरी है।

शुरुआत से ही इस किताब ने ऐसे बाँध लिया कि जैसे लगता हो कि जब तक खत्म न करूँ उठना ही नही है।

और जब इसे पढ़कर समाप्त किया तो ऐसा महसूस हुआ कि इसके आगे क्या?

कितनी घटनाएं ,कितने प्रसंग ,कितनी बातें ऐसी लगीं जैसे ये महसूस हुआ कि लेखक ने मेरे मन को कैसे पढ़ लिया।

यह तीन नौकरीपेशा युवतियों मदालसा,पल्लवी और चाँदनी की कहानी है।

जो उच्च पदों पर आसीन होने के बावजूद किस तरह अपनी छोटी छोटी इच्छाओं को मारती हैं और इन तमाम सामाजिक ताने बाने को तोड़ने की कसमसाहट कैसे उनके मन में पलती है।

सरकारी नौकरी और उच्च पद मिलने पर कैसे उनके परिवार रिश्तेदार उन्हें दुधारू गाय समझकर उनके आगे पीछे घूमते हैं।

लड़की होने के कारण परिवार में न मिलने वाले यथोचित सुविधाओं से लेकर ,एक प्रेमिका से लेकर पत्नी तक की सारी कश्मकश लेखक ने बहुत अच्छे से उभारा है।

फिर तीनों सहेलियों का अकेले विदेश यात्रा करने जाना ,सारे बंधनों को तोड़कर जिंदगी को जीना, कही न कही सामाजिक दायरों में बँधे होने के कारण अपनी इच्छाओं को घुटती स्त्री की कहानी है।

कुल मिलाकर स्त्री मनोभावों पर लिखी यह पुस्तक पढ़े जाने योग्य है।शब्द सरल सहज है,कुछ रेलवे से संबंधित शब्दों का प्रयोग किया गया है पर उसके अर्थ दिये होने के कारण मुश्किल नही पैदा करते।

0 likes

Support Ruchika Rai

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Ruchika Rai
Published By

Ruchika Rai

@ruchikarai

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

More stories in Bookreview
Surabhi sharma 17 Dec, 2022 1 min read min

चतुष्कोण

पुस्तक समीक्षा

880 1
More stories in Bookreview
Jahaji sandesh 04 Jan, 2022 1 min read min

रश्मिरथी : समीक्षा

दो न्याय अगर तो आधा दो , पर इसमें भी यदि बाधा हो तो , दे दो केवल पाँच ग्राम , रख्यो अपनी धरती तमाम ( तृतीय सर्ग - भाग -२ रश्मिरथी - कृष्ण चेतावनी ) हर सर्ग आपको आपके असल जीवन के मूल्य को समझाने का अचूक प्रयास करेगा और शायद सफ़ल भी हो जाये । और यक़ीन मानिए अगर आपने अभी तक यह महाकाव्य नहीं पढा तो आप हिंदी साहित्य के काव्य रस का अमृत नहीं चखा। ~ जहाज़ी संदेश ?

3802 1
More stories in Bookreview
Moumita Bagchi 16 Nov, 2021 2 mins read min

Untouchable : a review.

Book review

1108 0
More stories in Bookreview
19401 0