साँझेदारी में समानता

आलेख

Ruchika Rai
28 Feb, 2023 • 1 min read min read • hi
❤️ 0 💬 0 👁 800



आज जब महिला समानता और महिला सशक्तिकरण की हम बात कर रहे हैं तो मेरा मानना है कि महिला सशक्तिकरण उंस प्रकार होना चाहिए कि उन्हें विशेष रियायत न देकर समान रूप से पुरूषों की तरह ही अपनी क्षमता का उपयोग कर अपना मुकाम हासिल करना चाहिए।

आज के इस दौर में जब महिला पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही,बराबर रूप से उन्हें अपने विकास के अवसर मिल रहे।किसी भी क्षेत्र में उन्हें कमतर आँक कर पीछे नही किया जा रहा।बड़े से बडे निर्णय लेने की ,किसी भी मुद्दे पर अपने विचार रखने की,पढ़ाई से लेकर हर क्षेत्र में उन्हें अपनी पहचान और स्थान बनाने की पूरी छूट है तो घर से लेकर बाहर तक उन्हें विशेष तरजीह क्यों दी जा रही और अगर ऐसा किया जा रहा तो उसे बदलने की पूरी छूट उन्हें क्यों नही मिल पा रही।

मेरा मानना है कि महिलाओं के विकास के लिए सबसे पहले साँझेदारी में समानता होना जरूरी है।

इसको दो तरह से हम देख सकते हैं।

पहली उनके लिए क्या करने देना चाहिए-

1.महिलाओं को आर्थिक निर्णय लेने की आजादी दी जाए,उन्हें अपने वेतन,जरुरतों ,अपने शौक के साथ ही साथ अपनी संपति के विषय में निर्णय लेने ,विचार रखने की छूट मिले।बहुत बार ऐसा होता कि कागजों में उनके पास अकूत संपत्ति होती पर हक़ीक़त में वह शून्य होती।

2.अपने विषय,शौक ,नौकरी और इसके साथ ही अपने जीवन साथी चुनने की पूरी आजादी मिले।

3.कोई भी निर्णय उनपर थोपा न जाये बल्कि स्वेच्छा से वह सही गलत,पसंद नापसंद के बारे में बता सकें।

दूसरा महिलाओं को स्वयं कार्य करना चाहिए-

1.परिवार की आर्थिक मुद्दों को संभालने की जिम्मेदारी उन्हें भी लेनी चाहिए, सारे कार्य पुरूषों पर नही छोड़ना चाहिए।

2.मॉं बाप की संपत्ति में ही सिर्फ उन्हें हिस्सा नही लेनी चाहिए उनकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

3.नारीवाद के झूठे बहकावे में आकर रिश्तों को शर्तों पर न चलाकर स्वयं ही रिश्तों को परस्पर प्रेम विश्वास और आपसी समझदारी से संभालना चाहिए।

0 likes
☕

Support Ruchika Rai

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Ruchika Rai
Published By

Ruchika Rai

@ruchikarai

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

More stories in Education
Xleem • 01 Jul, 2026 • 1 min read min

Life

Life is a long journey, and most of us spend it chasing what we lack, while forgetting to be grateful for what we already hold.

112 0
More stories in Education
Xleem • 01 Jul, 2026 • 1 min read min

Li3f

Just read it

102 1
More stories in Education
Adhiraj • 14 Oct, 2025 • 2 mins read min

अंतर्राष्ट्रीय स्कूल

कहानी का संदर्भ शिक्षा के बढ़ते व्यापारिक स्वरूप से है | किस प्रकार शिक्षा दान के स्थान पर व्यापार बन कर विद्यालयों की गुणवत्ता गिरती जा रही है, इस समस्या का जिक्र कहानी में व्यंगात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है |

273 1
More stories in Education
fazal Esaf • 18 Jun, 2025 • 1 min read min

कहानी का शीर्षक: "मिट्टी के साथी"

"मिट्टी और मनुष्य" एक मार्मिक कहानी है जो शहरी जीवन की भागदौड़ और प्रकृति से अलगाव के बीच, मिट्टी और उसके सबसे छोटे जीवों — केंचुओं — के महत्व को दर्शाती है। कहानी फ़ज़ल एसाफ नाम के एक युवा, संस्कारी किसान के बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी गाँव की मिट्टी और उसके अनदेखे नायकों के प्रति गहरी समझ रखता है। कहानी की शुरुआत ठाणे के एक छोटे से कस्बे में बारिश के बाद की सुबह से होती है, जहाँ फ़ज़ल सड़क पर रेंगते केंचुओं को देखकर विचलित हो जाता है, क्योंकि लोग उन्हें बिना सोचे-समझे कुचल रहे हैं। वह एक केंचुए को उठाकर सुरक्षित स्थान पर रखता है और मन ही मन बुदबुदाता है कि लोग इस "कीड़े" की अहमियत नहीं समझते, जबकि यही उनकी "रोटियों" से जुड़ा है। आगे चलकर, फ़ज़ल का सामना तीन अलग-अलग राहगीरों से होता है: एक तेज़-तर्रार कॉर्पोरेट महिला, अदिति मैडम; एक अनुभवी बुज़ुर्ग, शास्त्री जी; और एक नन्हा लड़का, आर्यन। सबसे पहले, अदिति मैडम अनजाने में एक केंचुए को कुचल देती हैं। फ़ज़ल उन्हें रोकता है और विनम्रता से समझाता है कि यह "कीड़ा" नहीं, बल्कि "किसान का दोस्त" है जो मिट्टी को साँस देता है और ज़मीन को उपजाऊ बनाता है। अदिति शुरुआत में झिझकती हैं, लेकिन फ़ज़ल के शब्दों में छिपी सच्चाई उन्हें सोचने पर मजबूर कर देती है। इसके बाद, शास्त्री जी फ़ज़ल की बात का समर्थन करते हैं और अपने पुराने दिनों को याद करते हैं जब केंचुए को खेत में देखना अच्छी फसल का संकेत माना जाता था। वे आधुनिक समाज में मिट्टी से बढ़ती दूरी पर चिंता व्यक्त करते हैं। फ़ज़ल उन्हें समझाता है कि लोग मिट्टी को गंदगी समझते हैं, जबकि वही "गंदगी" उनकी थाली में गेहूं बनकर आती है, और केंचुए ही बिना किसी स्वार्थ के ज़मीन को जोतते हैं। कहानी में एक मार्मिक मोड़ तब आता है जब आर्यन, एक छोटा लड़का, केंचुए को "साँप जैसा कुछ" समझता है। फ़ज़ल धैर्य से उसे बताता है कि यह एक अर्थवर्म है जो मिट्टी को अंदर से जोतता है, हवा, पानी और बीज को पनपने में मदद करता है। वह आर्यन को समझाता है कि वह जो सब्ज़ियाँ खाता है, वे कहीं न कहीं केंचुए के कारण ही उगती हैं, जिससे आर्यन केंचुए को अपना दोस्त समझने लगता है। आर्यन की माँ भी इस छोटे लेकिन गहरे सबक के लिए फ़ज़ल को धन्यवाद देती हैं। एक छोटी सभा में, फ़ज़ल अदिति, शास्त्री जी और आर्यन को संबोधित करते हुए कहते हैं कि भले ही वे शहर में रहते हों और वह गाँव से हो, लेकिन "मिट्टी" ही वह धागा है जो उन सबको जोड़ता है। वह शहरी लोगों से मिट्टी के प्रति संवेदना रखने और छोटे जीवों को बचाने की अपील करता है। शास्त्री जी भावुक होकर कहते हैं कि जो समाज ज़मीन से रिश्ता तोड़ता है, वह रिश्तों की अहमियत भी भूल जाता है। कहानी का चरमोत्कर्ष तब आता है जब फ़ज़ल अपने झोले से एक मुट्ठी मिट्टी उठाता है जिसमें एक केंचुआ रेंग रहा होता है। वह भावनात्मक स्वर में समझाता है कि यह मिट्टी केवल मिट्टी नहीं, बल्कि "जीवन" है, जिसमें "मेहनत" और "उम्मीद" है। वह चेतावनी देता है कि जिस दिन केंचुए कम हुए, उस दिन रोटी भी महंगी हो जाएगी, मिट्टी बंजर हो जाएगी, और दिल भी। यह सुनकर आर्यन अब हर केंचुए को ध्यान से देखता है और वादा करता है कि वह उन्हें कुचलेगा नहीं। कहानी एक शक्तिशाली मोनोलॉग के साथ समाप्त होती है, जिसमें फ़ज़ल की आवाज़ बताती है कि शहर भले ही चमकता हो, लेकिन उसकी नींव वही मिट्टी है जो गाँवों में साँस लेती है। वह जोर देता है कि अगर हम मिट्टी को मारते रहेंगे, तो हम भी धीरे-धीरे मरेंगे, "बिना आवाज़ के, बिना मिट्टी के।" अंतिम पंक्तियाँ एक काव्यात्मक संदेश देती हैं: "जो रेंगता है ज़मीन पर, वो थामे है आसमान को। न कुचलिए उसे, क्योंकि वो पालता है हमें… चुपचाप।" संदेश: यह पटकथा एक सरल लेकिन गहन संदेश देती है: "ज़मीन पर चलिए, मगर ज़मीन को समझकर चलिए। क्योंकि वहीं से जीवन उगता है।" यह कहानी हमें प्रकृति के सबसे छोटे सदस्यों के महत्व को पहचानने और उसके साथ हमारे संबंध को फिर से स्थापित करने के लिए प्रेरित करती है।

367 0