दरिया...................

दरिया और सैलाब खूबसूरत भी और तबाही भी.

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rashi sharma
rashi sharma 11 Dec, 2022 | 0 mins read

किसी ने धक्का नहीं दिया, हम खुद ही चले आए,

तेरी गहराई को नापने नहीं, हम तो अपनी हिम्मत आज़माने चले आए,

माना की पानी से बैर मुर्खता कहलाती है,

लोगों से सुना है हमें समझदारी रास कहां आती है,


जाँचना चाहते है कि कितनी मुश्किल बर्दाशत कर सकते है,

है ते हम बड़े कठोर क्या तेरे सामने भी टिके रहते है,

ऊँची लहरों का तू राजा क्या हमेशा ही ऐसा रहता है,

या फिर नाराज़ होने पर ही गुस्से का इज़हार करता है,


फर्क तो देख जब हम खफा होते है तो कुछ कह नहीं पाते,

और जब तू आपे से बाहर होता है तो हम इंसान सह नहीं पाते,

समानता दोनों में एक ही है,

दोनों के गुस्से की वजह इंसान ही है.

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rashi sharma

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