खौफ हैं....................

ऐ दर्शाता है कि हम ज़िंदा है, माना कि ड़रते है बहुत चाज़ों से हम, लेकिन इसमें कोई शक नहीं, कि खौफ सिखाता है हमें कि क्या करना है या क्या नहीं.

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rashi sharma
rashi sharma 29 Sep, 2022 | 0 mins read

दुनिया से जाने का खौफ नहीं, खौफ है खुद के खो जाने का,

सिमटते है खुद में ऐसे जैसे डर है खुद से खुद को छीन जाने का,

अंधेरा नहीं ड़राता अब तो रोशनी हमें ड़राती है,

सहम चुके है इतने की परछाई भी अब हमसे दूर भागती है,


आज़ादी ने कब कहा कि वो बैखौफ है, कैदी ने कब कहा कि वो भय से दूर है,

मंज़र कैसा भी हो खौफ है कि जाता नहीं,

अभ्यास इतना तगड़ा है बुरी यादों का कि कई कोशिशों के बाद भी इक्मिनान आता नहीं,

सपना ड़राता है, कोई अपना ड़राता है, गैर से बात तक नहीं करते,

फिर भी ना जाने क्यों खौफ काटने को आता है.



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