सपना सच हुआ

मेरा सपना है कोई भी रोटी , कपड़ा और मकान के साथ विद्या है वंचित ना रहे ।

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Prem Bajaj
Prem Bajaj 02 Oct, 2020 | 1 min read

सपना सच हुआ


बचपन से ही मैं जब भी किसी अनपढ़ को देखती तो मन में एक टीस उठती थी , कि क्यों कोई

इन्हें भी पढ़ाता ? क्यों ये लाचार और बेचारगी की चक्की में पिस जाते हैं ?? जब भी किसी

अनपढ़ के साथ उसकी सुझता की कमी के कारण कोई अन्याय होता देखती तो बुरा लगता था ,

तब से मैंने मन में ठान लिया था कि जितना भी मुझ से बन पड़ा मैं अशिक्षित लोगों को शिक्षित करूंगी ‌

यही प्रण लिए मैंने गांव में सरकार से प्रार्थना कर के हाई स्कूल भी बनवा दिया , और साथ में बुज़ुर्गो के लिए भी पढ़ाई की व्यवस्था कराई ।



राम - राम चाची , कैसी हो ।

बहुते बढ़िया बचुआ , आजकल तो हम बहुते ही खुस रहते हैं , हमारा सपना जो पूरा हो गया ‌।

हां चाची ई बात तो है , इस गांव की तो काया ही पलट दी है आपने , याद है मुझे तीन साल पहले

आपने कैसे सरपंच जी से बहस और जिद करके बुज़ुगों के लिए पढ़ने लिखने की व्यवस्था कराने

में दिन - रात मेहनत की , वरना इहां तो सब वही चलता रहता देखा-देखी जो रामु काका के साथ हुआ ।

 हां बचुआ रामु भाई के हालात देखकर ही तो मेरे दिमाग में ये बात आई , अगर रामु भाई पढ़े होते तो ,

इस तरह उनका भतीजा उनको धोखा ना देता ‌।

हां चाची रामु काका का बेटा तो दूर देश में रहता है , ऊ तो इहां कभी चार-छह साल में ही आता है , उस पर भतीजे

ने धोखे से सारी जमीन के कागज पर सही ( साइन) करा लिए ।

बचुआ वहीं तो अगर रामु भाई पढ़े लिखे होते तो कागज़ पढ़ के ही सही करते ना ।

हूं ऊऊऊूऊऊ , मुझे याद है चाची , जब रामु काका को उसके भतीजे ने सब कुछ छोड़ने को कहा तब काका ने फौरन बेटे

को भी बुलाया , पंचायत भी बैठी , पर क्या हो सकता था , सही तो कर दिए थे ना काका ने , अब कौन जाने कब , कैसे किए ।

ऊ तो बेटा लायक था , बेचारा नसीब का मान के बाप को साथ ले चुपचाप चला गया ।

और करता भी क्या काम-धाम छोड़ कर इहां पड़ा रहता होता का कुछ भी नाहीं , ख़ैर अब तो बहुत अच्छा हो गया , सब लोग

कोई भी सरकारी चिठ्ठी पत्री हो या अपना कोई काम , पहले कागज पड़ते हैं फिर सही करते हैं ।

हां बचुआ , और इनके साथ - साथ मुझे भी तो फायदा हुआ , मैं भी तो बहुत कुछ सीख गई , कैसे बड़े लोगां के आफिस जाकर

बात करना , कोई सरकारी काम कैसे कहां से कराना ।

अब सोच रही हूं इन सब को एक अंग्रेजी का भी अध्यापक भी बुलाए के वो भी सिखा दे ‌

 ख़्याल बुरा नहीं चाची ।

धन्य हो चाची आपके सपने में जान तो है ?

 बचुआ , सपने तो हर इन्सान देखता है , लेकिन उनको सच बनाने की हिम्मत भी तो करें ना ।

 हां ,,,, सही है चाची । धन्य हो आप । ईश्वर आपका हर सपना पूरा करें ।


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