Preeti Gupta
Preeti Gupta 12 Jul, 2026
ज़िम्मेदारी
मां की उंगली, पिता की खामोशी बिन कहे सब समझा गई , बड़े हुए तो समझ आया,वहीं तो ज़िम्मेदारी का पहला दायरा था ! लोग कहते हैं खुद के लिए जी, पर कभी दूसरों के लिए जीने में खुद से मिल जाओगे !!ये कर्ज नहीं निवेश है , प्रेम, दुआओं का भंडार है , सुकून का संसार है !! फिर जब भी लगे भारी हीरा याद करना तुम तो इन्सान हो!!

Paperwiff

by preetigupta3

12 Jul, 2026

#responsibility

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