ज़िन्दगी

यह धूप छाँव से भरी ज़िंदगी जितनी खूबसूरत है उतनी ही गहरी और जटिल भी | इसी सिलसिले में एक स्वरचित कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ |

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chandra mohan katyal
chandra mohan katyal 05 Jul, 2026 | 1 min read

यह धूप छाँव से भरी ज़िंदगी जितनी खूबसूरत है उतनी ही गहरी और जटिल भी |

इसी सिलसिले में एक स्वरचित कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ |                                       

***

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम,

ये सयानों की दुनियां में नादान रहे हम |

होकर अपनों से अपने से बेसुध बेखबर ,

लगाके गैरों से ये दिल पशेमान रहे हम ||

 

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम 

न तो उतरे न समझे तेरी गहराइयों को ,

रहे भटकते बस यहाँ वहां यूँ ही हरदम |

न तो तुझे न तेरे हम दस्तूर को समझे ,

बस बहक गए उधर जिधर ले गए कदम ||

 

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम 

थी हसरतें कि मिलें कुछ लम्हें सुकून के,

बस इतना ही पाने को परेशान रहे हम |

सोचा था जियेंगे ज़िंदादिली से हर रोज़,

जिंदा रहने को हर पल हैरान रहे हम ||

 

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम 

रहे आसमाँ पे छोड़ के पैरों से ये ज़मीं,

रखीं ख्वाहिशें बहुत पर सब्र बहुत कम |

जब छूट गई ख्वाहिशें तो देखिये मज़ा,

क्या मस्ती से ज़िन्दगी गुजार रहे हम ||

 

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

 

चंद्र मोहन कत्याल

ग्रेटर नॉएडा, उत्तर प्रदेश-201310, भारत

ईमेल : katyalchandra@gmail.com

मोबाइल नंबर : 9005050840



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