आपकी अपनी भाषा, आपकी अपनी पहचान !

पेपरविफ केवल लिखने का मंच नहीं है, यह एक ऐसा सुंदर प्लेटफ़ॉर्म है, जो पुल की तरह काम करता है, जो एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति को जोड़ता है। यहां हिंदी, पंजाबी, हरियाणवी, मारवाड़ी, कन्नड़, बांग्ला, गुजराती, उर्दू, मराठी, तमिल,  तेलुगु, अंग्रेजी सभी एक माला में गूंथी हुई प्रतीत होती हैं।

Published By Paperwiff

Fri, May 22, 2026 3:31 PM

आपकी अपनी भाषा, आपकी अपनी पहचान !

भाषा सिर्फ़ अभिव्यक्ति का ज़रिया नहीं है, ये हमारी असली पहचान है। जब भी कोई इंसान अपनी बात कहना चाहता है, खासकर अपने दिल की बात तो सबसे बेहतर वह उसे अपनी बोली में ही कह पाता है।‌ अब चाहे वो कोई आम आदमी हो या लेखक, वो चाहता है कि अपनी भाषा में लिखें, ताकि उसके अपने लोग भी उसे पढ़ सकें।

नेल्सन मंडेला जी का एक फेमस कोट् है कि..

“If you talk to a man in a language he understands, that goes to his head. If you talk to him in his language, that goes to his heart.”

( अगर आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करते हैं जिसे वह समझ सकता है, तो वह केवल उसके दिमाग तक पहुँचती है। लेकिन अगर आप उसी व्यक्ति से उसकी भाषा में बात करते हैं, तो वह सीधे उसके दिल तक पहुँचती है।)

शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो नेल्सन मंडेला जी की इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता होगा। हम सभी कहीं ना कहीं अपनी भाषा या बोली से दिल से जुड़े रहते हैं।

लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि ----

आजकल लेखन से संबंधित ज्यादातर मंच, हिंदी और अंग्रेजी तक ही सिमट कर रह गये हैं। इसलिए जो व्यक्ति इन दोनों भाषाओं में अपने दिल की बात नहीं कह पाता,  वो लिख ही नहीं पा रहा है। जरा सोचिए, हमारे देश भारत में जहां नौ कोस पर पानी और सौ कोस पर बोली बदल जाती है, वहां ये गर्व‌ करने लायक बात  तो कम से कम नहीं है कि व्यक्ति अपनी भाषा में कुछ लिख ही ना सके।

आप सबको ये जानकर खुशी होगी कि पेपरविफ (Paperwiff) ने इस बैरियर को तोड़ा है। पेपरविफ केवल हिंदी या अंग्रेजी तक ही सीमित नहीं हैं। पेपरविफ पर भारत की हर क्षेत्रीय भाषा में लिखने और पढ़ने की सुविधा है।

हां ...बिल्कुल आप वेबसाइट (www.paperwiff.com) पर आइए और खुद देखिए, यहां अगर आप कन्नड़ में लिखना चाहते हैं तो लिखिए, पंजाबी में पढ़ना चाहते हैं तो पढ़िए, तमिल और हरियाणवी जानना चाहते हैं तो जानिये। आप उर्दू शायरी के शौकीन हैं तो अपनी क़लम को मौका दीजिए ना, वो खुलकर खुद को अभिव्यक्त कर सके।

अब सवाल उठता है कि....

आपको इसके लिए क्या करना होगा?

ज्यादा कुछ नहीं, एक बार साइन इन करके अपना प्रोफाइल बनाकर आप इस परिवार के पक्के सदस्य हो जायेंगे। फिर आप जब चाहें लोगइन (login) कर सकते हैं, अपनी कहानी, ब्लॉग, कविता, संस्मरण, शायरी यहां अपनी भाषा में लिख सकते हैं और जिस भाषा में चाहें पढ़ सकते हैं।

पेपरविफ केवल लिखने का मंच नहीं है, यह एक ऐसा सुंदर प्लेटफ़ॉर्म है, जो पुल की तरह काम करता है, जो एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति को जोड़ता है। यहां हिंदी, पंजाबी, हरियाणवी, मारवाड़ी, कन्नड़, बांग्ला, गुजराती, उर्दू, मराठी, तमिल,  तेलुगु, अंग्रेजी सभी एक माला में गूंथी हुई प्रतीत होती हैं।

इस मंच पर आप अपनी जड़ों से जुड़कर दुनिया से संवाद कर सकते हैं। जब आपका लिखा हुआ कंटेंट आपकी ही भाषा में विश्व स्तर पर पढ़ा जाता है, तो वो केवल लेखन नहीं रहता, वो आपकी संस्कृति का वाहक बन जाता है।

तो आइए, अपनी भाषा को अपनाएं, अपनी संस्कृति को कस कर पकड़े, और दूसरी सभी भाषाओं का सम्मान करें, अपने आपको हर भाषा में लिखे गए कंटेंट के साथ जोड़कर खुद को समृद्ध करें। पेपरविफ के साथ मिलकर इस खूबसूरत यात्रा का आनंद उठायें।