हाइकु: केवल 17 अक्षरों की कविता
हमारे ब्लॉग में जानिए हाइकु की कहानी, इसकी खासियत, मात्सुओ बाशो का प्रसिद्ध हाइकु और हिंदी में हाइकु लिखने का तरीका।
Published By Paperwiff
Mon, Aug 10, 2026 1:22 PM
हाइकु, जापानी कविता की वह शैली है जिसमें सिर्फ तीन पंक्तियों और 17 अक्षरों में पूरी बात कही जाती है। इसमें पहली पंक्ति में 5 अक्षर दूसरी पंक्ति में 7 अक्षर और तीसरी पंक्ति में 5 अक्षर होते हैं। हिंदी में इसमें मात्राएं और आधा अक्षर नहीं गिना जाता है। और एक बात और ध्यान देने लायक है, जब हम जापानी या किसी अन्य भाषा के हाइकु का हिंदी अनुवाद करते हैं तो अक्षरों की संख्या बदल सकती है। इसलिए अनुवाद में हाइकु का अक्षर पैटर्न बदल सकता है, इस बात को ध्यान में रखते हुए अनुवादित हाइकु पढ़े जाने चाहिए। अक्षर पैटर्न अलग अलग भाषाओं में अलग हो सकता है लेकिन तीन पंक्तियों का नियम प्रत्येक भाषा में निभाया जाता है। अपने छोटे आकार और गहरे भाव के अलावा इसके मूल में प्रकृति के दृश्य और उनसे जुड़ी क्षणिक अनूभूतियां होती हैं।
हाइकु की शुरुआत जापान में हुई और इसे सबसे अधिक लोकप्रिय बनाया मात्सुओ बाशो (Matsuo Bashō) ने। बाशो का मानना था कि हाइकु केवल कविता नहीं, यह जीवन की सूक्ष्मताओं को महसूस करने का एक तरीका है।
17 वीं शताब्दी में मात्सुओ बाशु ने अपने जीवनकाल में 1000 हाइकु कविताएं लिखीं जिसमें उन्होंने जापान की यात्रा करते हुए अपने अनुभवों को शब्द दिये।
"द नैरो रोड टू द डीप नॉर्थ"
जापान का सबसे प्रसिद्ध हाइकु संग्रह है, जो उन्होंने लिखा है।
उदाहरण के रूप में बाशो का एक प्रसिद्ध हाइकु देखते हैं..
古池や 蛙飛び込む 水の音
(Furu ike ya
Kawazu tobikomu
Mizu no oto)
इसका हिंदी में अनुवाद इस प्रकार है..
पुराना तालाब,
मेंढक कूद पड़ा,
पानी की हलचल।
यह हाइकु पूर्णतः 5-7-5 पैटर्न में है,(हिंदी अनुवाद में अक्षर संख्या अलग आ रही है, उस पर ध्यान न दें।)
इस हाइकु में केवल दृश्य नहीं, ध्वनि को भी अभिव्यक्त किया गया है।
आज हाइकु पूरे संसार में लोकप्रिय है। जापान से निकलकर यह अंग्रेजी, हिंदी और अन्य भाषाओं में भी रचा जा रहा है। आधुनिक कवि हाइकु के द्वारा अपने प्रकृति और जीवन से जुड़े सूक्ष्म अनुभवों को रच रहे हैं।
यदि आप भी हाइकु लिखना चाहते हैं, तो कुछ बातें जरूर ध्यान रखें...
1- तीन पंक्तियों में लिखिए, पहली पंक्ति में 5 अक्षर दूसरी में 7और तीसरी में 5 अक्षर लिखें। हिंदी में मात्रा व आधा अक्षर न गिनें।
देखिए एक हिंदी हाइकु...
कैसे कहूँ कि
किसकी याद आई?
तड़पा गई।
2- मौसम, प्रकृति और जीवन से जुड़े छोटे अनुभवों को केंद्र में रखकर ही हाइकु लिखें।
3- अपनी भावनाओं को सरल शब्दों में व्यक्त करें।
हिंदी में हाइकु का सफल प्रयोग करने का श्रेय "अज्ञेय" को दिया जाता है। उन्होंने अपने संग्रह
"अरी ओ करुणामय प्रभा" में अनेक हाइकु जैसी छोटी कविताएं लिखीं हैं जिन पर अभी भी शोध हो रहा है उनकी संरचना हाइकु से काफी मिलती जुलती है।
गागर में सागर के सिद्धांत को हाइकु पूरा करता है इसमें कोई लंबी कहानी नहीं होती, फिर भी इसकी गहरी बात पाठक के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। यही हाइकु की जादूगरी है।
अंत में, आप सबसे निवेदन रहेगा कि आप भी रचिए कुछ सुंदर हाइकु, आप पेपरविफ के माइक्रोफे़बल सेक्शन में वेबसाइट पर इनको लिख सकते हैं। जो बेहतरीन हाइकु होंगें उन्हें हम आपके नाम के साथ अपने इंस्टा पेज़ स्टोरी पर प्रकाशित करेंगे।
अब तो कोई देर नहीं होनी चाहिए आज ही एक हाइकु लिखें, हां ये जरूर याद रखें, हाइकु की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी सरलता में ही है।
देखिए शारदा मंडलोई जी का एक हाइकु...
हवा मद्धिम
पसरा है सन्नाटा
झिंगुर-गाएँ।