विज्ञापनों की दुनिया
A poem about the world of advertisements....
Photo by Eleni Afiontzi on Unsplash
विज्ञापनों की दुनिया का अजब कमाल है,
आजकल विज्ञापनों में बड़ा माल है।
रियल से अधिक बुद्धू बक्से पर इन की भरमार है,
बहुत बड़ा इनका कारोबार है।
एक महिला दूसरी से यह पूछती नजर आती है,
बहन, उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफेद क्यों नजर आती है।
उत्तर मिलता है, बहन वह अपनी साड़ी में 'रिन' जो लगाती है।
बच्चा अपना टिफिन स्कूल से वापस ले आता है,
क्योंकि, उसका पेट तो 'पारले जी' से ही भर जाता है।
मि० शर्मा के ऑफिस में सब कर्मचारी बिजी पाए जाते हैं,
जब भी जाता हूं, सब अपना पीले बटन वाला 'स्टिक ईजी पेन' ढूंढते नजर आते हैं।
नहीं मिलने पर बेचारे शर्मा जी बेहाल हैं,
विज्ञापनों की दुनिया का अजब कमाल है।
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