चाकू की लकीर

अगर इंसान ठान लेना तो उसकी रेखा ही नहीं अगर उसके हाथ में नहीं है ना तो वो भी बना सकता है, वैसे ही आप लोग भी ज़िन्दगी मैं कुछ करने की ठान लेना तो आप भी कुछ हासिल कर सकते है जो और कोई नहीं कर सकता।

Suraj
15 Jun, 2020 • 1 min read min read • hi
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चाकू की लकीर

Sarvepalli Radhakrishnan

एक बार तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में, एक ज्योतिषी आए थे

गांव वाले बड़े ही उत्सुक थे उनसे मिलने के लिए, और गाव में एक माता जी को भी मालूम चला, उनका इक पांच साल का बच्चा था, उस बच्चे ने अपनी मां से कहा,

मां मेरा भी हाथ उन ज्योतिषी को दिखाओ वो मेरे बारे में भी कुछ बताएंगे, 

वो ज्योतिषी दो- दो रुपए लेकर सारे गाव के बच्चों के भविष्य बता रहा थे।

मां भी अपने बच्चे को लेकर वहां पहुंची, तो उसने भी उस ज्योतिषी को अपने बच्चे का हाथ दिखाया, ज्योतिषी ने गौर से उसका हाथ देखा, और उस बच्चे की मां से बोले कि इसके हाथ मैं अभ्यास की रेखा नहीं है। 

तो उस बच्चे की मां बड़े ही चिंता में बोली, 

ज्योतिषी जी इस अभ्यास की रेखा का क्या मतलब है, 

वो बोले इसके हाथ मैं शिक्षा का योग्य नहीं है।

तो मां को बड़ी चिंता हुई इस बात से, 

की मेरा बच्चा शिक्षा नहीं ले सकेगा, मां की आंखों से आसू लगातार बेहने लगे, 

और बच्चा ये सब देख रहा था, बच्चा उस ज्योतिषी के पास गया,

और हाथ दिखाते हुए बोला, 

अगर मेरे हाथ में शिक्षा की रेखा होती तो कहा होती?

तो ज्योतिषी ने भी बताया अगर ये रेखा होगी तो यहां होगी,

तो बच्चा घर गया मां रास्ते भर रोती रही, 

तो जब वो बच्चा घर पहुंचा तो उसके इक हाथ में

चाकू था तो उसने उस चाकू से वो रेखा बनाली 

उसका हाथ खून से लत पत होगया,, 

जब मां ने देखा तो मां चिल्लाने लगी कि ये तुमने क्या किया?

परंतु बच्चा बिल्कुल स्वस्थ था, बच्चे ने अपनी मां की आंखों मैं देख कर बोला

मां आप बिल्कुल भी चिंता नहीं करो मैं बहुत मन लगाकर पड़ाई करूंगा

और में ज़िन्दगी मैं कुछ ऎसा काम करूंगा जिससे आपका नाम रोशन हो।

आपको जानकर आश्चर्य होगा इस बच्चे ने दिन रात मेहनत करी,

उसके बाद उन्होंने Oxford University मैं स्टडी करी,

आगे जाके ये visiting faculty हुए उस Oxford University मैं,

और बार बार Oxford University उनको लेक्चर देने के लिए बुलाता था।

और आपको जानकर आश्चर्य होगा, कि ये व्यक्ति और कोई नहीं

हमारे बड़े मसूर राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन है।


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