रेशम के धागे

भाई जब देश का रक्षक भी हो

Sushma Tiwari
13 Aug, 2019 • 1 min read • hi
❤️ 0 💬 0 👁 920
रेशम के धागे

ये जो दिखते हैं रेशम के धागे

नाज़ुक से, रंगीन से, कमजोर से

कलाई पर जाते ही वादे कई ये मांगे

उस भाई से, उस सैनिक से, उस रक्षक से


हाँ वो आ नहीं पाएगा इस राखी पर

बहना की देख राखी, कलाई पर इतराती 

डटा हुआ है जान लगा के सीमा पर

रक्षा का जो वचन दिया है, याद बहुत है आती


आँसू मत लाना बस उन आँखों में बहना

वचन निभाऊंगा हमेशा, भाई सन्देशा भेजे

देश में मेरी सारी बहने, उनसे बस यही कहना

खड़े है हम रक्षा में , प्यार कलाई पर सहेजे


मैं भाई भी हूँ, बेटा भी हूँ, हूं किसी का सुहाग

मातृभूमि से भी किया है रक्षा का एक वादा

रक्षा बंधन पर मैं गाऊं देश गीत के राग

रक्षा वचन लिया है, सैनिक हूं मैं भाई से ज्यादा 


0 likes
☕

Support Sushma Tiwari

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Sushma Tiwari
Published By

Sushma Tiwari

@SushmaTiwari

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

More stories in Fiction
Rakesh Nathani • 15 Oct, 2026 • 1 min read

बागी : एक चेतना

शरीर हार्डवेयर है, चेतना उसका ऑपरेटिंग सिस्टम। बिना OS के फोन जैसे देह बेजान है। हम शरीर नहीं, चेतना हैं, यह बोध अहंकार मिटाता है। कर्म तय करता है कौन सा हार्डवेयर मिलेगा। जब चेतना डेवलपर से जुड़ती है, तो डर मिटता है, इंसान सदा अमर हो जाता है। के

27 0
More stories in Fiction
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

34 0
More stories in Fiction
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

31 0
More stories in Fiction
Rakesh Nathani • 09 Oct, 2026 • 1 min read

मेरी राख: एक सफर

राकेश मृत्यु के बाद अपनी ही राख के सफर का साक्षी बनता है। जलगाँव में शरीर जलता है, फिर राख के तीन हिस्से — जन्मस्थान की नाराज़ नदी, पुणे के पुल पर बहा अधूरा इश्क़ और मुंबई के समंदर में विलीन अहंकार। आखिरी राख बेटा गुरुस्थान की मौन मिट्टी में बिखेरता है, जहाँ राकेश समझता है — मीटिंग, जायदाद, प्रेम सब रेगिस्तान में 'ओसिस' जैसा भ्रम था, सच तो शून्यता है।

43 0