माँ सरस्वती!

माँ सरस्वती से प्रार्थना!

Kumar Sandeep
24 Jun, 2020 • 1 min read • hi
❤️ 3 💬 2 👁 1300
माँ सरस्वती!

Photo by Soumik Dey on Unsplash

माँ सरस्वती!

मन से अहंकार तू मिटा दे,माँ!

अज्ञानता रुपी अंधकार दूर कर दे,माँ

ज्ञान का वरदान दे माँ

मन से मैल सदा के लिए मिटा दे माँ।।


माँ सरस्वती!

संपूर्ण जगत में सब के मन में

माँ तू ज्ञान का प्रकाश बिखेर दे

अज्ञानता दूर कर दे माँ शीघ्रातिशीघ्र

अपनी कृपादृष्टि बनाएं रखना माँ तू सर्वदा।।


माँ सरस्वती!

सब के मन में प्रेम का भाव तू भर दे

कोई भी किसी से रुठ कर बातें न करे

सब के मन में सुविचार भर दे माँ

हाँ माँ,तू अहंकार का भाव मिटा दे सबके मन से।।


माँ सरस्वती!

कड़ी मेहनत और लगन से 

प्राप्त करें हम सब सफ़लता

माँ तू सद्बुद्धि प्रदान कर दे

हाँ माँ, तू नेक राह दिखा दे ।।


©कुमार संदीप

मौलिक, स्वरचित,अप्रकाशित

3 likes
☕

Support Kumar Sandeep

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Kumar Sandeep
Published By

Kumar Sandeep

@Kumar_Sandeep

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

More stories in Spirituality
Rakesh Nathani • 19 Oct, 2026 • 1 min read

मीरदाद से मुलाकात: सवालों का समुंदर

लेखक को 'मिरदाद की किताब' पढ़ने के बाद सपने में मिरदाद मिलता है। मिरदाद समझाता है कि किताबें समुंदर जैसी हैं, जितना गहरा जाओगे नया अर्थ मिलेगा। हर व्यक्ति कर्मों के हिसाब से जीवन में आता है। उसका काम था सोई हुई चेतनाओं को जगाकर ईश्वर तक पहुँचाना।

48 0
More stories in Spirituality
Rakesh Nathani • 15 Oct, 2026 • 1 min read

बागी : एक चेतना

शरीर हार्डवेयर है, चेतना उसका ऑपरेटिंग सिस्टम। बिना OS के फोन जैसे देह बेजान है। हम शरीर नहीं, चेतना हैं, यह बोध अहंकार मिटाता है। कर्म तय करता है कौन सा हार्डवेयर मिलेगा। जब चेतना डेवलपर से जुड़ती है, तो डर मिटता है, इंसान सदा अमर हो जाता है। के

53 0
More stories in Spirituality
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

46 0
More stories in Spirituality
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

43 0